16 Targeted Killings This Year In Kashmir Valley Terrorist Target Civilians And Job Seekers

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Target Killing In Jammu Kashmir: कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में आतंकवादी टारगेट किलिंग (Target Killing) के तहत लोगों को मौत के घाट उतार रहे हैं. पिछले 31 दिनों में 7 लोगों की टारगेट किलिंग आतंकियों (Terrorists) ने की है. इनमें पुलिस कर्मी (Policeman), शिक्षक (Teacher) और आम नागरिक (Citizen) शामिल हैं. कल घाटी में आतंकियों (Terrorist) ने जम्मू के सांबा (Samba) की रहने वाली एक शिक्षिका रजनी बाला (Rajani Bala) को निशाना बनाकर हत्या कर दी. इससे एक हफ्ते पहले टीवी कलाकार (TV Actor) अम्बरीन भट्ट की हत्या कर दी गई थी. अगर इस साल हुई टारगेट किलिंग की अगर बात करें तो अब तक 16 लोगों की हत्या आतंकियों ने की है.

इस मामले पर जम्म-कश्मीर पुलिस के आला अधिकारी का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर आतंकी सिर्फ डर फैलाना चाहते हैं क्योंकि स्थानीय नागरिकों ने अब आतंकियों के फरमान का जवाब देना बंद कर दिया है.

आतंकी अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि समाज के विभिन्न वर्गों पर हमला करके आतंकी सिर्फ अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाना चाहते हैं. उनका कहना है कि आतंकवादी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिनके घाटी में रहने पर वो हमेशा से ही सवाल उठाते रहे हैं. ये आतंकी कश्मीरियों के लिए राज्य से बाहर निकालने के लिए सोची समझी साजिश के तहत हमला कर रहे हैं.

साल 2021 में 35 नागरिक मारे गए

टारगेट किलिंग के मामले साल 2021 में फरवरी महीने के बाद से तेज हो गए. इस तरह का पहला मामला तब आया था जब श्रीनगर में कृष्णा ढाबा के मालिक के बेटे को उसके रेस्त्रां के अंदर ही गोली मारकर हत्या कर दी थी. 5 अक्टूबर 2021 को केमिस्ट एमएल बिंदू की उनकी दुकान में हत्या कर दी गई. दो दिन बाद गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल  संगम के प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और स्कूल के शिक्षक दीपक चंद को हमलावरों ने स्कूल स्टाफ के पहचान पत्र की जांच के बाद गोली मार दी थी. पिछले साल घाटी में 182 आतंकवादी और कम से कम 35 नागरिक मारे गए थे.

इस वजह से घाटी में आतंकियों ने बदली रणनीति

ऐसे समय में जब कश्मीर में टारगेट अटैक (Target Attack) बढ़ रहे थे  तब पुलिस (Police) ने कहा था आतंकी (Terrorist) उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई से बौखला गए हैं. पुलिस ने कहा था कि टारगेट किलिंग (Target Killing) के बढ़ते मामलों के पीछे की वजह बड़ी संख्या में आतंकवादियों का सफाया, विशेष रूप से उनके नेतृत्व और उनकी समर्थन संरचनाओं को नष्ट करना है. पुलिस ने कहा कि आतंकवादी (Terrorist) निराश हो गए थे और उन्होंने निहत्थे पुलिसकर्मियों (Policeman), निर्दोष नागरिकों (Citizen), राजनेताओं (Politicians) और अब महिलाओं (Women) सहित अल्पसंख्यक समुदायों के निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अपनी रणनीति बदल दी.

ये भी पढ़ें: Blog: तो क्या अब जम्मू-कश्मीर बनने वाला है दूसरा दुबई ?

ये भी पढ़ें: जम्मू कश्मीर: टार्गेट किलिंग केस में NIA ने कसा शिकंजा, घाटी में 11 ठिकानों पर चल रही है छापेमारी

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